बिहार झारखंड सेल्स सम्मेलन को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। बिहार झारखंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव यूनियन (बीएसएसआर यूनियन) का 52वां राज्य सम्मेलन 20 और 21 जून 2026 को लहेरियासराय, दरभंगा में आयोजित किया जाएगा। सम्मेलन की सफलता सुनिश्चित करने के लिए 51 सदस्यीय स्वागत समिति का गठन किया गया है। इस आयोजन को श्रमिक आंदोलन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मुख्य सम्मेलन की तैयारियां तेज
23 मई 2026 को लहेरियासराय स्थित अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ कार्यालय परिसर में एक व्यापक बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता बीएसएसआर यूनियन के राज्य अध्यक्ष के डी प्रताप ने की। इस बैठक में दरभंगा जिले के विभिन्न श्रमिक संगठनों और स्वतंत्र फेडरेशन के नेताओं ने भाग लिया।
बैठक के दौरान कर्मचारी नेता फूल कुमार झा को सर्वसम्मति से 52वें राज्य सम्मेलन की स्वागत समिति का अध्यक्ष चुना गया। वहीं बीएसएसआर यूनियन के यूनिट सेक्रेटरी प्रिंस कुमार को सम्मेलन का संयोजक बनाया गया।
सम्मेलन लहेरियासराय स्थित प्रेक्षा गृह ऑडिटोरियम में आयोजित होगा। इस अवसर पर अखिल भारतीय संगठन एफएमआरएआई एवं बीएसएसआर यूनियन के संस्थापक ज्ञान शंकर मजूमदार सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे। साथ ही एफएमआरएआई के राष्ट्रीय महासचिव और कई राष्ट्रीय नेता भी सम्मेलन में शामिल होंगे।
बैठक में अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के जिला मंत्री फूल कुमार झा, सीटू के राज्य महासचिव अनुपम कुमार, एफएमआरएआई के सचिव मनोज चौधरी, बीएसएसआर यूनियन के महासचिव शशि प्रकाश समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने अपने विचार रखे। नेताओं ने श्रमिक आंदोलन, संगठनात्मक संघर्ष और मजदूर हितों से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।
श्रमिक आंदोलन और राजनीतिक परिस्थितियों पर चर्चा
बैठक में नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय राजनीति में बढ़ती वित्तीय पूंजी के प्रभाव को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि कॉर्पोरेटपरस्त नीतियों के कारण आम जनता और मजदूर वर्ग के अधिकारों का लगातार हनन हो रहा है।
नेताओं ने देश में बढ़ती महंगाई, राष्ट्रीय संपदाओं के निजीकरण और जनता के संवैधानिक अधिकारों पर हो रहे हमलों का मुद्दा भी उठाया। इसके साथ ही चार नए लेबर कोड लागू किए जाने से मजदूर वर्ग के सामने उत्पन्न होने वाली कठिन परिस्थितियों पर विस्तार से चर्चा की गई।
वक्ताओं ने कहा कि आने वाले समय में श्रमिक आंदोलन को और मजबूत बनाने के लिए संगठित रणनीति की आवश्यकता है। यही कारण है कि इस बार का बिहार झारखंड सेल्स सम्मेलन केवल एक संगठनात्मक कार्यक्रम नहीं बल्कि भविष्य की श्रमिक नीति तय करने वाला मंच भी माना जा रहा है।
सम्मेलन में निम्न प्रमुख विषयों पर चर्चा होगी:
- श्रमिक आंदोलन की भविष्य की रणनीति
- मजदूर अधिकारों की रक्षा
- लेबर कोड का प्रभाव
- संगठन विस्तार और मजबूती
- संयुक्त आंदोलन की दिशा

सम्मेलन का महत्व और पृष्ठभूमि
बीएसएसआर यूनियन लंबे समय से बिहार और झारखंड में सेल्स रिप्रेजेंटेटिव कर्मचारियों के अधिकारों के लिए संघर्ष करता रहा है। संगठन ने कई बार संयुक्त श्रमिक आंदोलनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
इस बार दरभंगा में आयोजित होने वाला बिहार झारखंड सेल्स सम्मेलन इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि देशभर में श्रमिक संगठनों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो रही हैं। निजीकरण, महंगाई और श्रम कानूनों में बदलाव के कारण कर्मचारियों के अधिकारों पर असर पड़ रहा है।
बैठक में बैंक यूनियन, पोस्टल यूनियन, इंश्योरेंस यूनियन, किसान सभा, खेत मजदूर यूनियन और बिहार राज्य आंगनबाड़ी सेविका सहायिका संघ के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। सभी संगठनों ने सम्मेलन को सफल बनाने और श्रमिक आंदोलन को मजबूत करने का भरोसा दिया।
सम्मेलन के जरिए अलग-अलग संगठनों के बीच समन्वय बढ़ाने की भी कोशिश की जाएगी ताकि भविष्य में संयुक्त आंदोलन को नई दिशा मिल सके।
आगे क्या होगा और इसका क्या असर पड़ेगा
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सम्मेलन आने वाले वर्षों में बिहार और झारखंड के श्रमिक आंदोलनों की दिशा तय कर सकता है। सम्मेलन में पारित प्रस्ताव मजदूर संगठनों की भविष्य की रणनीति पर असर डालेंगे।
सम्मेलन में बड़ी संख्या में राज्यभर से प्रतिनिधियों और श्रमिक नेताओं के शामिल होने की संभावना है। इससे श्रमिक संगठनों को एक साझा मंच मिलेगा जहां वे अपनी समस्याओं और मांगों को मजबूती से उठा सकेंगे।
इसके अलावा सम्मेलन के जरिए संगठन विस्तार, युवा कार्यकर्ताओं की भागीदारी और डिजिटल माध्यमों के जरिए श्रमिक आंदोलन को मजबूत करने पर भी चर्चा हो सकती है। इससे यूनियन को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
निष्कर्ष
दरभंगा में आयोजित होने वाला बिहार झारखंड सेल्स सम्मेलन 2026 श्रमिक संगठनों के लिए एक बड़ा आयोजन साबित हो सकता है। 51 सदस्यीय स्वागत समिति के गठन के साथ सम्मेलन की तैयारियां तेज हो गई हैं।
यह सम्मेलन केवल संगठनात्मक बैठक नहीं बल्कि मजदूर हितों, अधिकारों और भविष्य की रणनीति तय करने का महत्वपूर्ण मंच बनेगा। आने वाले दिनों में इस सम्मेलन से जुड़े कई बड़े फैसले श्रमिक आंदोलन को नई दिशा दे सकते हैं।

दरभंगा से सौरभ झा की रिपोर्ट
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